25 माचॆ 2552 / 25 March 2552 Buddha age.

 

मावमञ्ञोथ पु़ञ्ञस्स, न मं तं आगमिस्सति।

उदबिन्दुनिपातेन, उदकुम्भोपि पूरति।

धीरो पूरति पुञ्ञस्स, थोकं थोक म्पि आचिनं।।

122 वह मेरे पास नहीं आयगा ऐसा (सोच कर) पुण्य की अवहेलना न करे।

बूंद बूंद पानी गिरने से घड़ा भर जाता है। (ऐसे ही) थोड़ा थोड़ा संचय करता हुआ धीर (व्यकित ) पुण्य से भर जाता है।

 

122 – Não subestime o mérito dizendo: “Ele não vai retornar para mim!” De gota em gota, mesmo uma jarra se enche com água. Da mesma forma, o Sábio, pouco a pouco se preenche com a bondade.

 

122 – Do not disregard merit, saying: “It will not come nigh unto me!” By the falling of drops, even a water-jar is filled; likewise the wise man, gathering little by little, fills himself with good.

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27 माचॆ 2552 / 27 March 2552 Buddha age.

 

वाणिजोव भयं मग्गं, अप्पसत्थो महद्धनो।

विसं चीवितुकामोव , पापानि परिवज्जये।।

123 जैसे छोटे काफि ले (परंतु ) विपुल धन वाला व्यापारी भययुकत माग्ग (मागॆ) को, अथवा जीवित रहने की इच्छा वाला (व्यकित ) विष की (छोड़ देता है), (वैसे ही) (मनुष्य ) पापों को छोड़ दे।

 

123 – Assim como um mercador, com poucos acompanhantes e grande fortuna, evita uma rota perigosa; assim como quem quer viver evita um veneno, da mesma forma deve-se evitar o que é mau.

 

123 – Just as a merchant, with a small escort and great wealth, avoids a perilous route, just as one desiring to live avoids poison, even so should one shun evil things.

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28 माचॆ 2552 / 28 March 2552 Buddha age.

 

पाणिम्हि चे वणो नास्स, हरेय्य पाणिना विसं।

नाब्बणे विसमन्वेति, वत्थि पापं अकुब्बतो।।

124 यदि हाथ में व्रण (घाव) न हो ते हाथ से विष को ले सकता है (क्योंकि) व्रणरहित (घावरहित ) (शरीर में ) विष नहीं चढ़ता है। (ऐसै ही) (पापक मॆ) न करने वालै को पाप नहीं लगता ।

 

124 – Se a mão não está ferida, pode carregar um frasco de veneno. O veneno não afeta a mão que não está ferida. Não há doença que afete a quem não faz o mal.

 

124 – If no wound there be in one´s hand, one may carry poison in it. Poison does not affect one who has no wound. There is no ill for him who does no wrong.

 

 

 

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29 माचॆ 2552 / 29 March 2552 Buddha age.

 

ये च वस्ससतं चीवे, अपस्सं धम्ममुत्तमं।

एकाहं चीवितं सेय्यो, पस्सतो धम्ममुत्तमं।।

125 उत्तम धम्म (धमॆ) (नवविध लोकोत्तर धम्म अथॊत चार माग्ग (मागॆ), चार फल और निब्बण (निवॊण) कोन देखने वाले व्यकित के सौ वषॆ के जीवन से उत्तम धम्म (धमॆ) को देखने वाले (व्यकित ) का एक दिन का जीवन श्रोयस्कर होता है।

 

125 – Quem quer que faça o mal a uma pessoa indefesa, pura e sem culpa alguma, sobre esse tolo o mal se retrai, como um fino pó, atirado contra o vento.

 

125 – Whoever harms a harmless person, one pure and guiltless, upon that very fool the evil recoils, like fine dust thrown against the wind.

 

 

 

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31 माचॆ 2552 / 31 March 2552 Buddha age.

 

गब्भमेके उप्पज्जन्ति, निरयं पापकम्मिनो।

सग्गं सुगतिनो यन्ति, परिनिब्बन्ति अनासवा।।

126 कोई (मनुष्य लोक सें) गभॆ में उत्पत्र होते हैं, पापकमिं नरक में (जाते हैं), सुगति वाले स्वगॆ में जाते हैं, और अनाश्रव (चित्तमलरहित ) निब्बाण (निवॊणलाभ करते हैं।

 

125 – Alguns nascem do ventre, os que fazem o mal nascem em estados malignos; quem se comporta bem atinge estados de felicidade; os Livres de Obstáculos alcançam o Nibbána. (Nirvana)

 

125 – Some are born in a womb; evildoers are born in woeful states; the well-conducted go to blissful states; the Undefiled Ones pass away into Nibbana. (Nirvana)

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2 प्रैल 2552 / 02 April 2552 Buddha age.

 

न अन्तलिकखे न समुद्दमज्झे, न पब्बतानं विवरं पविस्स।

न विज्जती सो जगतिप्पदेसो, यत्थट्ठितो मुच्चेय्य पापकम्मा।।

127 (अनंत) आकाश में, न समुद्र (की गहराइयों) में, न पवॆतों की (गुहा-) कं दराओं में प्रवेश करके– (इस) जगत में, क हिं भी तो ऐसा सथान नहीं है जहां ठहरा हुआ (कोई) अपने पापक मों (अकु शलसंस्कारों के क मॆफ लें) को भोगने से बच सके।

127 – Não no céu, nem no meio do Oceano, nem numa caverna na montanha, alguém encontra no mundo um abrigo para escapar das consequências do mal praticado.

 

127 – Not in the sky, not in the mid ocean, not in a mountain cave, is found that place on Earth where abiding one may escape from the consequences of one´s evil deed.

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3 अप्रैल 2552 / 03 April 2552 Buddha age.

 

न अन्तलिकखे न समुद्दमज्झे, न पब्बतानं विवरं पविस्स।

न विज्जती सो जगतिप्पदेसो, यत्थट्ठितं नप्पसहेय्य मच्चु।।

128 (अनंत) आकाश में, न समुद्र (की गहराइयों) में, न पवॆतों की (गुहा-) कं दराओं में प्रवेश करके– (इस) जगत में, क हिं भी तो ऐसा सथान नहीं है जहां ठहरा हुए को मृत्यु न पकड़ ले, न दबोच लें

127 – Não no céu, nem no meio do Oceano, nem numa caverna na montanha, alguém encontra no mundo um abrigo onde vai superar a morte.

 

127 – Not in the sky, not in the mid ocean, not in a mountain cave, is found that place on Earth where abiding one will not be overcome by death.

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6 अप्रैल 2552 / 06 April 2552 Buddha age.

 

दण्डवग्गो – The Verses on Punishment

Os Versos sobre Punição

सब्बे तसन्ति दण्डस्स, सब्बे भायन्ति मच्चुनो।

अत्तानं उपमं कत्वा, न हनेय्य न घातये।।

129 सभी दंड से डरते हैं। सभी को मृत्यु से भय लगता है। (अतः ) सभी को अपने जैसा समझ करन (किसीकी) हत्या करे,, न हत्या करते के लिए प्रेरित करे।

 

129 – Todos tremem diante da vara. Todos têm medo da morte. Comparando os outros a si mesmo, ninguém deveria bater nem mandar que batam.

 

129 – All tremble at the rod. All fear death. Comparing others with oneself, one should neither strike nor cause to strike.

 

 

 

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8 अप्रैल 2552 / 08 April 2552 Buddha age.

 

सब्बे तसन्ति दणडस्स , सब्बेसं जीवितं पियं।

अत्तानं उपमं कत्चा , न हनेय्य न घातये।।

130 सभी दंड से डरते हैं। जीवित रहना सबको प्रिय लगता है। (अतः) (सभी को) अपने जैसा समझ करन (कि सीकी ) हत्या करे , न हत्या करने के लिए प्रेरित करे।

 

130 – Todos tremem diante da vara. A vida é preciosa para todos. Comparando a si mesmo com os outros, ninguém devia bater, nem mandar bater.

 

130 – All tremble at the rod. Life is dear to all. Comparing others with oneself, one should neither strike nor cause to strike.

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28 अप्रैल 2552 / 28 April 2552 Buddha age.

 

सुखकामानि भूतानि यो दण्डेन विहिंसति।

अत्तनो सुखमेसानो, पेच्च सो न लभसे सुखं।

131 जो सुख चाहने वाले प्राणियों को, अपने सुख की चाह से, दंड से विहिंसित करता है (कष्ट पहुंचाता है), वह मर कर सुख नहीं पाता।

 

131 – Quem quer que tente buscar a felicidade causando sofrimento aos outros, não vai encontrá-la.

 

131 – Whoever tries to seek happiness through hurting others, cannot find it.

 

1 मई 2552 / 01 May 2552 Buddha age.

 

सुखकामानि भूतानि, यो दण्डेन न हिंसति।

अत्तनो सुखमेसानो, पेच्च सो लभते सुखं।।

132 जो सुख चाहने वाले प्राणियों को, अपने सुख की चाह से, दंड से विहिंसित नहीं करता (कष्ट नहीं पहुंचाता है), वह मर कर सुख पाता है।

 

132 – Quem quer que tente buscar a felicidade não causando sofrimento aos outros, vai encontrá-la.

 

131 – Whoever tries to seek happiness through not hurting others, will find it.